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संस्थान के बारे में

राष्ट्रीय त्वचा रोग यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (रा.त्व.रो.यू.चि.अनु.सं.), जिसे पहले केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (के.यू.चि.अनु.सं.) के नाम से जाना जाता था, हैदराबाद में स्थित एक प्रमुख संस्थान है, जो यूनानी चिकित्सा के अनुसंधान एवं रोगी देखभाल के लिए समर्पित है। यह संस्थान यूनानी चिकित्सा के क्षेत्र में अपने व्यापक शैक्षणिक कार्यक्रमों तथा अत्याधुनिक अनुसंधान के लिए जाना जाता है। यूनानी चिकित्सा एक पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है, जिसकी जड़ें ग्रीको-अरबी चिकित्सा परंपरा में निहित हैं।

 

रा.त्व.रो.यू.चि.अनु.सं. यूनानी चिकित्सा की दो प्रमुख विधाओं—मुआलजात और इल्मुल अदविया में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करता है। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को यूनानी चिकित्सा के क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा अभ्यास एवं अनुसंधान के लिए आवश्यक गहन सैद्धांतिक ज्ञान तथा व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। प्रारंभ में, वर्ष 2016 में प्रत्येक विधा में प्रवेश की क्षमता सात विद्यार्थियों की निर्धारित की गई थी। हालांकि, इन विषयों की बढ़ती मांग एवं इनके महत्व को ध्यान में रखते हुए, वर्ष 2020 से प्रत्येक विधा में प्रवेश क्षमता बढ़ाकर नौ कर दी गई।

 

यह संस्थान तेलंगाना राज्य के वारंगल स्थित कालोजी नारायण राव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (के.एन.आर.यू.एच.एस.) से संबद्ध है। यह संबद्धता सुनिश्चित करती है कि संस्थान उच्च शैक्षणिक मानकों का पालन करता है तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एन.सी.आई.एस.एम.) द्वारा निर्धारित कठोर एवं सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम के अनुरूप कार्य करता है। पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसमें पारंपरिक यूनानी चिकित्सा सिद्धांतों को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समन्वित किया जा सके, जिससे विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा प्राप्त हो और वे समकालीन स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की आवश्यकताओं के लिए सक्षम बन सकें।

 

रा.त्व.रो.यू.चि.अनु.सं. के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश अत्यंत प्रतिस्पर्धी होता है और यह पूर्णतः योग्यता के आधार पर किया जाता है। इच्छुक विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना होता है, जिसका पाठ्यक्रम बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (बी.यू.एम.एस.) के पाठ्यक्रम के अनुरूप होता है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एन.टी.ए.) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय आयुष स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा (एआईएपीजीईटी) प्रवेश के लिए प्रमुख आधार है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल योग्य एवं समर्पित विद्यार्थियों को ही इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त हो। इसके अतिरिक्त, संस्थान भारत सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण नीतियों का पालन करता है, जिससे विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा के समान एवं न्यायसंगत अवसर प्राप्त हो सकें।

 

रा.त्व.रो.यू.चि.अनु.सं. की उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता इसकी शिक्षा एवं अनुसंधान की समग्र पद्धति में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। संस्थान केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करता, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान को भी विशेष महत्व देता है। विद्यार्थियों को अत्याधुनिक सुविधाओं एवं संसाधनों का लाभ मिलता है तथा उन्हें ऐसे अनुसंधान परियोजनाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जो यूनानी चिकित्सा के विकास में योगदान दे सकें। शिक्षा, अनुसंधान और व्यावहारिक अनुभव का यह समन्वय विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक जीवन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने तथा यूनानी चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करता है।

 

संक्षेप में, हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय त्वचा रोग यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (रा.त्व.रो.यू.चि.अनु.सं.) शिक्षा एवं अनुसंधान के माध्यम से यूनानी चिकित्सा के विकास एवं उन्नति के लिए समर्पित एक अग्रणी संस्थान है। अपने कठोर एवं उच्च स्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रमों, अत्याधुनिक सुविधाओं तथा उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता के साथ रा.त्व.रो.यू.चि.अनु.सं. भारत में यूनानी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।